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आचार्य आयुर्वेदा

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Hemant Kumar Mar 23, 2024

वसंत ऋतु में आहार: आयुर्वेदिक अपथ्यों का पालन कैसे करें


वसन्त ऋतु में अपथ्य: आयुर्वेदिक परंपरा का अनुसरण करें

भारतीय संस्कृति में ऋतुओं का अपना महत्व है और वसंत ऋतु उनमें से एक है, जो प्राकृतिक उपचारों और आहारिक सिद्धांतों के लिए एक महत्वपूर्ण समय है। वसंत ऋतु के दौरान, आयुर्वेद का मानना है कि विशेष प्रकार के भोजन और व्यवहार शरीर के लिए अच्छे नहीं होते हैं। यहां हम वसंत ऋतु में अपथ्यों के बारे में चर्चा करेंगे:

1. गुरु (देर से पचने वाले भक्ष्य पदार्थ): वसंत ऋतु में अत्यधिक गुरु भोजन का सेवन करना अधिक दिक्कत और कफ के वृद्धि का कारण बन सकता है। अधिक मसालेदार, तले हुए और तेल से भरपूर खाने से बचें।

2. शीतल पदार्थ: वसंत में ठंडे पदार्थ जैसे कि बर्फ, आइसक्रीम आदि का सेवन कम करें। इन्हें पचाने में शरीर को ज्यादा ऊर्जा की आवश्यकता होती है जो कि वसंत की गर्मी में बढ़ जाती है।

3. दिन में सोना: वसंत ऋतु में दिन में ज्यादा सोना न करें, क्योंकि यह कफ के वृद्धि को बढ़ा सकता है। समय पर सोना और नियमित आहार का सेवन करना शरीर के लिए अच्छा होता है।

4. स्निग्ध (घी-तेल से बने हुए खाद्य पदार्थ), अम्ल तथा मधुर रस-प्रधान पदार्थों का सेवन न करें: वसंत में ऐसे भोजन सावधानी से करें, क्योंकि ये शरीर को कफवर्धक बना सकते हैं। तेल, मक्खन, घी, चीनी, आदि का अधिक सेवन न करें।

वसंत ऋतु के इन अपथ्यों का पालन करने से, हम अपने शरीर को कफवर्धक तत्वों से बचा सकते हैं और स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। इसे समझने और अपने आहार में संशोधन करने से हम अपने स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं।

ध्यान दें: यह जानकारी केवल सामान्य सलाह है और किसी भी आयुर्वेदिक उपचार के लिए विशेषज्ञ की सलाह का विकल्प चिन्हित नहीं करती है। किसी भी नई आहारी या चिकित्सा परिवर्तन से पहले डॉक्टर या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से परामर्श जरूर लें।