ANU TAIL अणु तेल
DHOOTPAPESHWAR ANU TAIL अणु तेल - 15ml
  • DHOOTPAPESHWAR ANU TAIL अणु तेल - 15ml
  • DHOOTPAPESHWAR ANU TAIL अणु तेल - 15ml
  • DHOOTPAPESHWAR ANU TAIL अणु तेल - 15ml
  • DHOOTPAPESHWAR ANU TAIL अणु तेल - 15ml

DHOOTPAPESHWAR

ANU TAIL अणु तेल

₹ 85


Delivery Options


अणु तैल से नियमित रूप से नस्य करने से सिर में होनेवाले इंद्रिय तथा नाक, कान और आँखों की शक्ति बढ़ती है। इसके प्रयोग से बार बार होने वाले सर्दी, नाक बहना और सिरदर्द में राहत मिलती है। मन्याक्षेत्र की बीमारियों से जुड़े लक्षण जैसे बाहों में दर्द, जकडाहट और झुनझुनाहट की अनुभूति में राहत देने में भी यह फायदेमंद है।
नस्य अर्थात् नाक में प्रयुक्त की जानेवाली औषधि। कंधे के ऊपर होनेवाले शरीर के अंगों के स्वास्थ्यरक्षणार्थ यह असरदार उपाय है अणु तैल इसकी प्रसिद्ध औषधि है। 

उपयोग: इंद्रियों को बल दे, उर्ध्वजत्रुगत विकार (शिर एवं मन्या के विकार), पालित्य (अकाल बाल सफेद होना)।

घटक द्रव्य: प्रति १० मि.लि. तिल तैल ९.६८९ मि.लि., जीवन्ती, हीबेर, देवदारु, मुस्ता, त्वक्, उशीर, सारिवा (श्वेत), चंदन (श्वेत), दारुहरिद्रा, यष्टी, प्लव, अगरु, शतावरी, कमल, बिल्व, उत्पल, कंटकारी, बृहती, रास्ना, शालपर्णी, पृश्निपर्णी, विडंग, त्वक्पत्र, एला (सूक्ष्म), रेणुक बीज, कमल, बला प्रत्येक ०.३२९ ग्रा. से प्राप्त हुआ सार, अजादुग्ध (प्रतिनिधी: गोदुग्ध) ८.८७५ मि.लि. से प्राप्त स्नेह । 

मात्रा: नस्य के लिए २ बूंद दिन में एक से दो बार या चिकित्सक की सलाह अनुसार।

विधि निर्देश: १) सिर को थोड़ा पीछे की तरफ नीचे झुकाए हुए और दोनों पैरों को थोड़ा ऊपर उठाए हुए पीठ के बल लेटें । 
२) अपने नाक के सिरे को बाई मध्यमा उंगली से ऊपर उठाए और अंगूठे से एक नासिका को बंद करें। 
३) लंबी सांस लेकर सांस को क्षणिक रोककर २ बूंद अणु तैल धीरे से खुली नासिका में नासा पटल की ओर डालें। ४) औषधि भीतर जाने तक सांस लेते रहे। यही प्रक्रिया दूसरे नासिका में दोहराए। 
५) लगातार गहरी सांस लेते हुए ५ मिनट तक उसी स्थिती में रहें। अतिरिक्त कफ थूक दें। यदि आवश्यक हो तो गुनगुने जल से कुल्ला करें। ध्यान दे की औषधि आँखों में ना गिरें। प्रक्रिया के दौरान हंसना, बोलना, छींकना या शारीरिक हलचल ना करें। 
यदि शास्त्रोक्त विधि का पालन मुश्किल लगता है, तो छोटी उंगली पर अणु तैल की २ बूंद लेकर नासिका के भीतर कुछ इस तरह से लगाए कि वह नाक के भीतरी परत पर ठीक से लग जाए। यही प्रक्रिया दूसरे नासिका में दोहराए। सुनिश्चित करें कि उंगली का नाखून ठीक तरह से कटा हुआ हो और हाथ धोया हुआ हो।


No Customer Reviews

Share your thoughts with other customers