अश्वगंधारिष्ट ASHWAGANDHARISHT
अश्वगंधारिष्ट ASHWAGANDHARISHT - 450ml

अश्वगंधारिष्ट ASHWAGANDHARISHT

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'अश्वगंधा' इस बल्य, वृष्य, रसायन एवं सप्तधातुपोषक द्रव्य से बना अरिष्ट है, अश्वगंधारिष्ट । यह अरिष्ट धात्वग्नि प्रदीपन कर धातुपोषणक्रिया में सुधार लाता है। मानसिक एवं शारीरिक दौर्बल्य, थकान नष्ट कर स्फूर्ति प्रदान करता है। शुक्रवर्धक एवं वृष्य होने से शुक्रक्षय, नपुंसकता, जरावस्थाजन्य इंद्रिय शैथिल्य आदि विकारों में प्रभावी है।

उपयुक्तता:
कार्श्य, नपुंसकता, शुक्रक्षय, शारीरिक, मानसिक एवं वातनाडी दौर्बल्य, वातविकार, मूर्च्छा, भ्रम, शिरःशूल, स्मरणशक्ति में कमी, बेचैनी, वृद्धावस्था की शिथिलता, उन्माद, अग्निमांद्य

घटक द्रव्य -
प्रति १० मि.लि. में निम्नोक्त द्रव्यों से प्राप्त क्वाथ:
अश्वगंधा २५ भाग, श्वेत मुशली १० भाग, अर्जुन , त्रिवृत् ५ भाग, धातकीपुष्प ८ भाग, दुरालभा ४ भाग, मधु १५० भाग, चित्रक ४ भाग, गुड यथावश्यक, वचा ४ भाग, यष्टीमधु ५ भाग, श्वेतचंदन ४ भाग, विदारी ५ भाग, रक्तचंदन ४ भाग, मंजिष्ठा ५ भाग, सारिवा ८ भाग, हरीतकी ५ भाग, प्रियंगु २ भाग, हरिद्रा ५ भाग, नागकेशर १ भाग, दारुहरिद्रा ५ भाग, रास्ना ५ भाग, मुस्ता ५ भाग,
प्रक्षेप द्रव्य: त्रिजात प्रति २ भाग, त्रिकटु प्रति १ भाग

मात्रा:
2 से 4 चम्मच (10 से 20 मि.लि.) दिन में 2 से 3 बार समभाग जल के साथ (चिकित्सकीय परामर्श अनुसार)
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KG
दीपन, पाचन, वृष्य, वातनाशक, प्रमेह, स्नायुदुर्बलता, उन्माद, शोष, बवासीर, मूर्च्छा, मस्तिष्क की निर्बलता, भ्रम मिर्गी, हृदय रोग, शरीर में स्फूर्ति, वीर्य की शुद्धि व वृद्धि करता है।

मात्रा: 15 मि.ली. से 20 मि. ली. दिन में 2 बार ।
(चिकित्सक के परामर्श अनुसार)


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